मनहरण घनाक्षरी छंद

 सरस्वती वंदना 

(१)
नमामि  हंसवाहिनी,
हे मां  कमलवाहिनी,
वंदन है   करबद्ध,
स्तुति स्वीकार करो।१।

अज्ञानतम   छाया है,
पथभ्रमित   काया है
ज्ञानपुंज  दिव्यज्योति
मां अंधकार हरो ।२।

शुचिता हो लेखन में ,
पावनता  जीवन  में ,
रसना  मधुर  बोले ,
नहीं अहंकार हो ।३।

तिमिर अंतर  घिरा
मिले नहीं कोई सिरा
धुंध छाई  चहुं  ओर
मधु उद्धार करो ।।४।।

मधु झुनझुनवाला 

करें हम अराधना मां कमलवाहिनी,🙏🙏

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